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‘एक साल से बोल रहा हूं, शिप्रा गंदी है… आपको शर्म नहीं आती, मुझे तो आती है’
उज्जैन | शिप्रा नदी की दुर्दशा को देख संभागायुक्त एमबी ओझा के सब्र का बांध मंगलवार को टूट गया। नगर निगम के अफसरों से कहा पिछले एक साल से कह रहा हूं कि शिप्रा गंदी है, प्रदूषण बढ़ रहा है इसे साफ करो… आपको शर्म नहीं आ रही लेकिन मुझे तो आ रही है। मैं कहता हूं काम करो तो आप करोड़ों के टेंडर निकाल रहे हैं पर काम चालू नहीं हो रहा। अब शिप्रा शुद्घिकरण के काम में लेटलतीफी हुई तो निलंबित कर दूंगा, तैयार रहें।
शिप्रा शुद्घिकरण के नाम पर अब तक करोड़ों रुपए खर्च हो चुके हैं और हाल वही हैं जो बरसों पहले थे। हाल ही में शिप्रा शुद्घिकरण न्यास के पदाधिकारियों ने भी शिप्रा की हालत पर तीखी नाराजी जताई थी और बैठक का बहिष्कार कर चले गए थे। इस पर संभागायुक्त ने हर माह शिप्रा शुद्घिकरण को लेकर प्रशासनिक स्तर पर बैठक लेने की बात कही थी। मंगलवार को बृहस्पति भवन में उन्होंने नगर निगम व पीएचई के अधिकारियों से कहा शिप्रा नदी को प्रवाहमान बनाने, गंदगी दूर करने के लिए बार-बार चेता रहा हूं पर कोई काम नहीं हो रहा। संयुक्त आयुक्त विकास उज्जैन संभाग प्रतीक सोनवलकर, एडीएम जीएस डाबर, यूडीए सीईओ अभिषेक दुबे भी मौजूद थे।
नमामि नर्मदे की तर्ज पर चलाएं अभियान
संभागायुक्त ने कहा शिप्रा शुद्घिकरण न्यास की 21 मई को बैठक होगी, इसमें सभी विभाग पालन प्रतिवेदन पेश करें। जिस तरह नर्मदा की सफाई के लिए शुद्घिकरण अभियान चलाया गया था, उसी तरह शिप्रा शुद्घिकरण के लिए भी कार्य करें। शिप्रा उज्जैन की जीवन रेखा है। यह हमारी पहचान है। इसको शुद्घ रखना सबकी जिम्मेदारी है। शासकीय के साथ नैतिक जिम्मेदारी भी है। इसके लिए सभी सेवाभाव से जुट जाएं। बैठक में जल संसाधन विभाग देवास के इंजीनियर योगेंद्र गिरी ने कार्ययोजना बताई।
शिप्रा में स्नान भी मुश्किल…
मंगलवार को कलेक्टर की जनसुनवाई में तैराक व शिप्रा नदी में रोज स्नान करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता विनोद चौरसिया ने आवेदन देकर शिकायत की कि शिप्रा का पानी इतना प्रदूषित हो गया है कि वे खुद स्नान नहीं कर पा रहे। नहाने के बाद शरीर हरे रंग का हो रहा। मछलियों के मरने से अत्यंत दुर्गंध आ रही है।